Thursday, January 10, 2008

खालीपन का संगीत

गाए हैं बहुत ही मैंने, सुख और दुःख के गीत
आओ सुनाऊँ आज खालीपन का भी संगीत।

महसूस की है तुमने रागिनी जो बजती है
जब बाहों में होकर भी मिलता नहीं मीत?

जब सैलाब-सा होता है मन के अंदर कोई पर
मिलती नहीं दो बूँद जिससे धरती जाए रीत।

मुस्कान की जगह आँसू आते आँखों में जब,
जीत कर भी ज़िन्दग़ी में मिलती नहीं जीत।

2 comments:

Utpal Kumar said...

pyari si kavita jaya.
ye bhatkan hi manjil tak le jati hai. man ke sath bhatakna hi to duniya ki khoj hai, duniya ki samajh hai. nadi ki dhara hai.... bhatko .. man ke sath bhatakne se daro mat.
Utpal
utpal@aupsmultimedia.com

ami-thy-luv said...

bahut khub