Tuesday, June 21, 2005

No Title

किसी और को सौंप दूँ तो क्या
क़िस्मत तो वो मेरी ही रहेगी।

जो लिख गई लिखने वाले के हाथों
कहानी तो वो वही कहेगी।
आँखें मूँद भी लूँ मैं तो क्या
बंद पलकों से ही बहेगी।

राज कर सकती है मुझपर
बातें मेरी क्यों सहेगी?

अजूबा लगता हो लगने दो
अँधेरा होता है चिराग तले ही।

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